लोगों से उनकी जमीन छिनी जा रही है. झूठे कागज बनाकर उनसे उनका हक छीना जा रहा है. और ये आरोप ओडिशा के आदिवासी लगा रहे हैं, जिनकी जमीन के भीतर बॉक्साइट का भंडार है. इसी खज़ाने के लिए आदिवासियों और वेदांता जैसी मल्टीनेशनल कंपनी के बीच जंग छिड़ी है.

ओडिशा का दक्षिणी हिस्सा — रायगढ़ा और कालाहांडी जिला. यहां घने जंगल हैं, ऊंचे पहाड़ हैं, और सैकड़ों सालों से रह रहे हैं आदिवासी — खासकर कुई और कटिया कोंध समुदाय के. इन्हीं पहाड़ों के नीचे छुपा है एक खज़ाना — बॉक्साइट. वो मिनरल जिससे एल्युमिनियम बनता है. ओडिशा के सिजिमाली में करीब 311 मिलियन टन हाई क्वालिटी वाले बॉक्साइट का भंडार है और ये 1,549 हेक्टेयर में फैला हुआ है.

इस भंडार पर नज़र है वेदांता लिमिटेड की. मार्च 2023 में ओडिशा सरकार ने सिजिमाली माइनिंग ब्लॉक की नीलामी की. वेदांता ने नीलामी जीती और उसे 50 साल की लीज़ दी गई. कंपनी की योजना है कि वो हर साल 9 मिलियन टन बॉक्साइट निकाले. सरकार और कंपनी का तर्क है — इससे रोज़गार आएगा, सड़कें बनेंगी, इलाके का विकास होगा. लेकिन आदिवासी पहले दिन से ही इसके खिलाफ थे.

इस प्रोजेक्ट से करीब 100 परिवारों को अपना घर छोड़ना होगा और 500 से ज़्यादा परिवारों की रोज़ी-रोटी पर असर पड़ेगा. स्थानीय लोगों का कहना है कि असल में 50 से ज़्यादा गांव इसकी चपेट में आएंगे. इस इलाके में पनिचिदा-शुआगड रिवर सिस्टम और 100 से ज़्यादा बारहमासी नाले हैं जो आदिवासी खेती और जीवन का आधार हैं. इस इलाके में तिजी राजा पूजा स्थल है, जो स्थानीय समुदायों के लिए धार्मिक महत्व रखता है. आदिवासियों का कहना है कि सिजिमाली सिर्फ जमीन नहीं, उनकी मां है.

अप्रैल 2024 में NLSIU बेंगलुरु की एक इंडिपेंडेंट रिपोर्ट ने दावा किया कि जनगणना 2011 के अनुसार जो गांव पूरी तरह निर्जन थे वहां भी ग्राम सभाएं हुईं और सहमति दर्ज की गई. RTI से मिले दस्तावेज़ों में मरे हुए व्यक्तियों के हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान मिले.

अगस्त 2024 में आदिवासी गांवों ने खुद नई ग्राम सभाएं कीं और एकमत से माइनिंग प्रोजेक्ट को नकार दिया. जुलाई 2025 में केंद्र सरकार ने एक महीने के लिए वेदांता की Forest Land Acquisition योजना रोक दी — कारण था सहमति में धोखाधड़ी की आशंका.

अप्रैल 2026 में रायगढ़ा ज़िला प्रशासन ने एक 3 किलोमीटर लंबी सड़क बनाना शुरू किया जो सिजिमाली को स्टेट हाईवे 44 से जोड़ेगी. जब सड़क निर्माण शुरू हुआ तो गांव वाले सड़क पर उतर आए. 6-7 अप्रैल की रात पुलिस और आदिवासियों के बीच झड़पें हुईं, जिनमें करीब 70 लोग घायल हुए.

बहुत से लोग सिजिमाली की तुलना नियामगिरि से करते हैं. 2013 में वेदांता की एक और माइनिंग प्रोजेक्ट को ओडिशा की 12 ग्राम सभाओं ने सर्वसम्मति से नकार दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक निगरानी में ग्राम सभाएं करवाईं और उनके फैसले को माना गया. सिजिमाली में वही सवाल दोहराया जा रहा है — लेकिन न्यायिक निगरानी अभी तक नहीं आई.

विकास ज़रूरी है. लेकिन किसके लिए? किसकी कीमत पर? ये सवाल सिर्फ सिजिमाली का नहीं है, बल्कि उन सभी इलाकों का है जहां जमीन के नीचे मिनरल्स हैं और जमीन के ऊपर इंसान बसे हैं.