28 मई 2026, बकरीद का दिन था. गाजियाबाद के खोड़ा इलाके में एक 17 साल के लड़के की जिंदगी उस दिन हमेशा के लिए खत्म कर दी गई. उसका नाम था सूर्या चौहान. 11वीं का छात्र.
सूर्या मूल रूप से उत्तर प्रदेश के एटा जिले का रहने वाला था. परिवार में मां, बहन और सूर्या खोड़ा में किराये के मकान में रहते थे. उनके पिता का कुछ समय पहले निधन हो चुका था. भाई यश मदर डेयरी में काम करते थे, उन्हीं की कमाई से घर चलता था.
मृतक सूर्या और आरोपी असद पिछले करीब एक साल से दोस्त थे. करीब आठ महीने पहले सूर्या और असद के बीच एक छोटी-सी बात को लेकर विवाद हो गया था. उसी पुरानी नाराजगी को मन में रखकर असद ने बकरीद के दिन का इंतजार किया.
28 मई की शाम को आरोपियों ने सूर्या को फोन करके चौधरी स्कूल के पास वाली एक सुनसान गली में मिलने के लिए राजी किया. सूर्या को जरा भी शक नहीं था कि पहले से जाल बिछाया जा चुका है. जैसे ही सूर्या वहां पहुंचा, पहले से घात लगाकर बैठे असद, नवाब, फरहान, आतिफ और सारिक समेत अन्य युवकों ने उसे चारों तरफ से दबोच लिया.
चश्मदीदों के मुताबिक जब सूर्या वहां पहुंचा, तब आरोपियों ने उसे रोका, और फिर उससे एक सवाल पूछा — क्या तुमने कभी बकरा हलाल होते देखा है? सूर्या ने मना किया. वो वहां से जाना चाहता था. लेकिन उसे जाने नहीं दिया गया. दावा किया गया कि असद ने सूर्या पर 7 बार चाकू घोंपा.
घायल सूर्या को नोएडा के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां करीब 24 घंटे तक चले इलाज के बाद उसकी मौत हो गई. पुलिस ने 3 नामजद अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है. मुख्य आरोपी असद अभी भी फरार है.
सूर्या चौहान 17 साल का था. पिता पहले ही गुज़र चुके थे. भाई कमाता था, वो पढ़ता था. एक मां को, एक परिवार को इंसाफ मिलना चाहिए.
